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Showing posts from July, 2017

आइए आज हम आपको बताते है की दूध की शुद्धता की पहचान कैसे करें–

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1. दूध की पहचान करने के लिए सर्वप्रथम आप उसकी खुशबू लें यदि उस दूध में साबुन जैसी गंध आती है तो वह दूध सिंथेटिक है इसके विपरीत शुद्ध दूध में कुछ खास गंध नहीं आती है. 2. शुद्ध दूध स्वाद में हल्का मीठा होता है, जबकि नकली और सिंथेटिक दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने के कारण कड़वा हो जाता है. 3. शुद्ध दूध को कुछ समय या 1 से अधिक दिन भी स्टोर करने पर उसका रंग नहीं बदलता, जबकि नकली दूध कुछ ही समय के बाद पीला पड़ने लगता है. 4. दूध में पानी के मिलावट की पहचान करने के के लिए दूध को एक काली सतह पर थोड़ा सा गिरा दे यदि दूध असली होगा तो उसके पीछे एक सफेद लकीर छूटेगी अन्यथा नही. 5. यदि हम शुद्ध दूध को उबालते है तो उसका रंग नही बदलता है, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है. 6. दूध में पानी की मिलावट की जांच के लिए दूध को किसी चिकनी सतह जैसे लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की एक या दो बूंद टपकाइये आप देखेंगे की यदि दूध शुद्ध है तो निचे की और बहने पर उसके पीछे सफ़ेद धारी जैसा निशान हो जायेगा यदि ऐसा नही होता है तो दूध अशुद्ध है. 7. यदि हम दूध को हाथो में लेकर ...

The Story About Mother Cow By Lord Sh Krishna

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To teach by example, Sri Krishna and Lord Balram show us when They descend into this world, how important is to protect, love and serve Cows and Bulls. Krishna is known as Gopala (protector of the Cows) or Govinda (one who gives pleasure to the Cows). Lord Balram represents plowing the land for agriculture and therefore always carries a plow in His hand, whereas Krishna tends Cows and therefore carries a flute in His hand. Thus the two brothers represent krisi-raksha (protecting Bulls by engaging them in farming) and go-raksha (protecting the Cows). 10.5.20 Purport Lord Krishna says in Srimad Bhagavatam, "I can be worshiped within the Cows by offerings of grass and other suitable grains and paraphernalia for the pleasure and health of the Cows, and one may worship Me within the Vaishnavas by offering loving friendship to them and honoring them in all respects." Kamadhenu, the sacred cow which grants all wishes and desires, is an integral part of Hindu mythology. This d...

भक्त के वश में है भगवान

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एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया बनाकर रहते थे ! एक किरात (जानवरों का शिकार करने वाला)रहता था संत को देखकर हमेशा प्रणाम करता था !ऐसा हमेशा होता था रोज किरात कुटिया के सामने से निकलता और संत को प्रणाम करता !एक दिन किरात संत से बोला -बाबा !मै तो मृग का शिकार करने आता हूँ ;आप यहाँ किसका शिकार करने आते हो ?संत बोले -मै श्रीकृष्ण मृग का शिकार करने आता हूँ इतना कहकर संत रोने लगे ! किरात बोला -बाबा रोते क्यों हो ;मुझे बताओ ये कृष्ण देखने में कैसा है ?मैंने कभी इस तरह के शिकार के बारे में नहीं सुना ;मै अवश्य ही आपका शिकार आपको लाकर दूँगा !संत ने भगवान का स्वरुप बता दिय -काले रंग का है,मोर का मुकुट लगाता है,बासुरी बजाता है !किरात बोला -तुम्हारा शिकार हम पकड़कर लाते है जब तक शिकार हम आपको लाकर नहीं देगे तब तक पानी भी नहीं पीयेगे इतना कहकर किरात चला गया ! अब तो एक जगह जाल बिछाकर बैठ गया ३ दिन हो गए किरात के मन में वही संत द्वारा बताई छवि बसी हुई थी यूँ ही बैठा रहा ! भगवान को दया आ गई और बाल कृष्ण बासुरी बजाते हुए आ गए और स्वयं ही जाल में फस गए !किरात ने तो कभी देखा नहीं था संत द्वारा ...

हनुमान जी के अजर-अमर होने के 10 पक्के सबूत ! सबूत पढ़कर आप हनुमान के परम भक्त बन जाओगे

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कलयुग में अगर आप सुखी रहना चाहते हैं तो आपको हनुमान की पूजा जरूर करनी होगी. आप किसी को भी अपना प्रिय देवता मानते रहें लेकिन अगर आप हनुमान की पूजा नहीं करते हैं तो आपको दुःख और परेशानियाँ घेरती रहेंगी. अब आप ऐसा मत सोचिये कि आपको यह बातें हम बता रहे हैं किन्तु यह तो कलयुग के शास्त्रों में लिखा है कि हनुमान कलयुग के भगवान हैं. साथ ही साथ हनुमान ही ऐसे देवता हैं जो साक्षात् धरती पर कलयुग में विराजमान भी रहेंगे. तो आज हम आपको हनुमान जी के जीवन से जुड़ी कुछ रहस्यमयी बातें बताते हैं – हनुमान जी के होने के सबूत बताते है – 1. रामायण में बताया गया है कि जब लक्ष्मण मुर्छित पड़ें हुए थे तो वैद जी ने जिन जड़ी बूटियों का नाम बताया था वह हिमालय पर्वत पर ही मिलती थी. तब हनुमान जी हिमालय गये थे और वहां से पूरा पहाड़ ही उठाकर लाए थे. बाद में विज्ञान के समय श्रीलंका के अन्दर जो वह पहाड़ है उसकी जांच हुई तो वह और हिमालय के पहाड़ एक समान पाए गये थे. यह बात दर्शाती है कि हनुमान जी हिमालय से पहाड़ लेकर गये थे. 2. श्रीलंका का एक आदिवासी कबीला है जिसका नाम मातंग कबीला है. हनुमान जी इस कबीले के लोगों से आ...

जब घर में हों मकड़ी के जाले

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वास्‍तु के अनुसार मकड़ी के जाले घर में बहुत अशुभ माने जाते हैं। अमूमन देखा जाता है घर के निचले हिस्सों की तो सफाई हो जाती है लेकिन छत या ऊपरी हिस्सों की ठीक से सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में वहां मकड़ी द्वारा जाले बना लिए जाते हैं। घर में ये जाले होना अशुभ माना जाता है। लोग कहते हैं कि घर में मकड़ी के जाले नहीं होना चाहिए। ये अशुभ होते हैं। ये अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक कारण मौजूद हैं। मकड़ी के जालों की संरचना कुछ ऐसी होती है कि उसमें नकारात्मक ऊर्जा एकत्रित हो जाती है। इसलिए घर के आनजिस भी कोने में मकड़ी के जाले होते हैं, वह कोना या हिस्सा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इस कारण घर में कलह, बीमारियां व अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। मकड़ी के एक जाले में असंख्य सूक्ष्मजीव रहते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पंहुचाते हैं। इसलिए कहा जाता हैं कि अगर घर में मकड़ी के जाले होते हैं तो घर की सुख-समृद्धि का नाश होने लगता है क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा के कारण घर का माहौल इतना अशांत हो जाता है कि व्यक्ति चाहकर भी अपने काम को मन लगाकर नहीं कर पाता है। इसलिए मकड...

कैसे हो गौ-रक्षण गौ-पालन

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गायों के संरक्षण के लिए एकमात्र उपाय यह है कि पहले हमें पुनः गौ-धन की उपयोगिता स्थापित करनी होगी. वर्तमान परिदृश्य में हम गौ-धन संरक्षण के लिए पुर्णतः गौशाला पर निर्भर हो गये हैं. गौशाला एक तरह से गायों के लिए सहारा भर है, यदि उसे हम पूर्णकालिक गौ-संरक्षण व्यवस्था की तरह अपनायेंगे, तो गौ-वंश रक्षा का हमारा उद्देश्य शायद फलीभूत होगा. गौशाला की व्यवस्था बेसहारा गायों के लिए बहुत पहले से उपलब्ध रही है, लेकिन पूर्णकालिक व्यवस्था के लिए जरूरी है कि किसान पुनः अपने घरों में गौ-पालन प्रारंभ करें. यांत्रिक खेती ने बैलों को खेतों से बाहर कर दिया है, इस कारण किसान के घरों में गाय की उपयोगिता नहीं रही. साथ ही देशी गाय की दूध उत्पादन क्षमता कम होने से किसान को उसका रख-रखाव महंगा पड़ने लगा है. खासकर चरनोई की भूमि खत्म होना भी एक कारण है, जिसकी वजह से किसानों ने गाय की जगह दूध के लिए भैंस को अपना लिया है. एक समय था, जब गांवों में किसानों के घरों में गायें होती थीं और कस्बों के घरों में भी  गौ-पालन को महत्व दिया जाता था. शहरीकरण ने धीरे-धीरे कस्बों के घरों से गाय को दूर किया और अब यांत्रि...

पंचगव्य सेवन

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 भारतीय वंश की गौमाता से मिलने वाले पांच गव्य (दूध, घी, मट्ठा, गौमूत्र एवं गोबर)| पंचगव्य शब्द एक देशी भारतीय नस्ल की गाय के पांच प्रमुख पदार्थ – गाय के मूत्र, गोबर, दूध, मट्ठा और घी द्वारा निर्मित दवा का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया है| सभी पाँच गव्य सभी बीमारियों को ठीक करने में सक्षम है| सभी औषधीय गुणों के अधिकारी हैं और औषधीय उद्देश्य के लिए इनका उपयोग अकेले या आयुर्वेद में वर्णित कुछ अन्य जड़ी बूटियों के साथ संयोजन कर किया जाता है| गौमूत्र अर्क जिसे ‘गौमयादी अर्क’ या ‘गौमयादी सर्वरोग निवारिणी’ कहा जाता है एक प्रबल कैंसर विरोधी और एच आई वी विरोधी औषधी है, यह शरीर के तीनो दोषों (वात, पित्त और कफ ) को संतुलित भी करता है, इसलिए इसका सेवन किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जो अपने आपको स्वस्थ रखना चाहता हो| जय श्री कृष्ण

भारतीय नस्ल की गाय विश्व में सर्वोत्तम

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मानी जाती है ।। पुराणों में और आयुर्वेद में दूध के जो श्रेष्ठ गुण वर्णित हैं, उनका संबंध कामधेनु कहलाने वाली भारतीय नस्ल की गायें से ही है ।। मां के दुध के पश्चात् सर्वाधिक लाभदायक, रोगों से लड़ने की शक्ति देने वाला, सुपाच्य, कम वसा युक्त, दैवी संस्कारों से युक्त तथा कैरोटीन युक्त दूध केवल भारतीय नस्ल की गाय ही देती है ।। इसी के दही, छाछ और घी का महत्व वर्णन किया जाता है ।। भैंस का, जर्सी या संकर गायों का, सोयाबीन का या रासायनिक दूध, वह दूध नही है जिससे सही अर्थों में हमारा तन- मन स्वास्थ रह सके ।। मगर बाजार में तो यही सब मिल रहा है और मजबूरी में हम इसे ही ले भी रहे हैं ।। अब तो प्लास्टिक थैली में पैक दूध और पावडर दूध चलन में है जिसकी गुणवत्ता के बारे में कुछ कहना ही बेकार है ।। जय श्री कृष्ण

संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है याद रखियेगा !

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सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए। पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे। ऊपर जाने पर एक सवाल ये भी पूँछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायू (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ो पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शौक में 4. मन्दिर में 5. कथा में

पंचगव्य शरीर के लिए

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पंचगव्य शरीर के साथ मन व बुद्धि को भी शुद्ध, सबल व पवित्र बनाता है | शरीर में संचित हुए रोगकारक तत्वों का उच्चाटन कर सम्भावित गम्भीर रोगों से रक्षा करने की क्षमता इसमें निहित है | इसमें शरीर के लिए आवश्यक जीवनसत्व (विटामिन्स), खनिज तत्व, प्रोटीन्स, वसा व ऊर्जा प्रचुर मात्रा में पायी जाती है | गर्भिणी माताएँ, बालक, युवक व वृद्ध सभी के लिए यह उत्तम स्वास्थ, पुष्टि व शक्ति का सरल स्त्रोत है |  निर्माण व सेवन-विधि : १ भाग गोघृत, १ भाग गोदुग्ध, १ भाग गोवर का रस, २ भाग गाय का दही व ५ भाग छाना हुआ गोमूत्र, सब मिलाकर २५–३० मि.ली. प्रात: खाली पेट धीरे-धीरे पियें | बाद में २ – ३ घंटे तक कुछ न लें | तीन बार इस मंत्र का उच्चारण करने के बाद पंचगव्य पान करें |  यत् त्वगस्थिगतं पापं देहे तिष्ठति मामके |  प्राशनात् पंचगव्यस्य दहत्वग्निरिवेन्धनम् ||  अर्थात त्वचा, मज्जा, मेधा, रक्त और हड्डियों तक जो पाप (दोष, रोग) मुझमें प्रविष्ट हो गये है, वे सब मेरे इस पंचगव्य-प्राशन से वैसे ही नष्ट हो जाये, जैसे प्रज्वलित अग्नि में सुखी लकड़ी डालने पर भस्म हो जाती है | (महाभारत)

गौमाता की सेवा का माहात्म्य

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(गौमाता की सेवा के माहात्म्य) अनादिकाल से मानवजाति गौमाता की सेवा कर अपने जीवन को सुखी, सम्रद्ध, निरोग, ऐश्वर्यवान एवं सौभाग्यशाली बनाती चली आ रही है. गौमाता की सेवा के माहात्म्य से शास्त्र भरे पड़े है. आईये शास्त्रों की गौ महिमा की कुछ झलकियाँ देखे –  (गौ को घास खिलाना कितना पुण्यदायी) तीर्थ स्थानों में जाकर स्नान दान से जो पुन्य प्राप्त होता है, ब्राह्मणों को भोजन कराने से जिस पुन्य की प्राप्ति होती है, सम्पूर्ण व्रत-उपवास, तपस्या, महादान तथा हरि की आराधना करने पर जो पुन्य प्राप्त होता है, सम्पूर्ण प्रथ्वी की परिक्रमा, सम्पूर्ण वेदों के पढने तथा समस्त यज्ञो के करने से मनुष्य जिस पुन्य को पाता है, वही पुन्य  बुद्धिमान पुरुष गौ माता को ग्रास खिलाकर प्राप्त कर लेता है.  गौ सेवा से वरदान की प्राप्ति जो पुरुष गौ की सेवा और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है, उस पर संतुष्ट होकर गौ माता उसे अत्यंत दुर्लभ वर प्रदान करती है. गौ सेवा से मनोकामनाओ की पूर्ति गौ की सेवा यानि गाय को चारा डालना, पानी पिलाना, गाय की पीठ सहलाना, रोगी गाय का ईलाज करवाना आदि करने वाले मनुष्य पुत्र,...