Posts

भगवान शिव का वाहन ‘नंदी’

Image
पुराणों में यह कथा मिलती है कि शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरोंने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। शिलाद निरंतर योग तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे । अतः उन्होंने संतान की कामना से इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र का वरदान मांगा। इंद्र ने इसमें असर्मथता प्रकट की तथा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। तब शिलाद ने कठोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया और उनके ही समान मृत्युहीन तथा दिव्य पुत्र की मांग की। भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। उसको बड़ा होते देख भगवान शंकर ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम में भेजे जिन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि नंदी अल्पायु है। नंदी को जब यह ज्ञात हुआ तो वह महादेव की आराधना से मृत्यु को जीतने के लिए वन में चला गया। वन में उसने शिव का ध्यान आरंभ किया। भगवान शिव नंदी के तप से प्रसन्न हुए व दर्शन वरदान दिया- वत्स नंदी ! तु...

पाप जिसे करने से बचना चाहिए

शादीशुदा लोगों से कभी संबंध नहीं बनाने चाहिए. उनको पाने की इच्छा या बुरी नज़र रखना पाप माना जाता है. दूसरों के धन पर नज़र नहीं रखना चाहिए. किसी और के धन-दौलत को अपना बनाने की चाहत भी पाप है. किसी निर्दोष को दुःख पहुंचाने से बचना चाहिए. उसको किसी भी प्रकार का कष्ट देना या उसके मार्ग में बाधाएं पैदा करना घोर पाप है. ऐसे व्यक्ति को भगवान शिव कभी माफ़ नहीं करते. सदैव अच्छा और सच्चा मार्ग चुनना चाहिए. ग़लत राह पर चलने वालों को भगवान कभी माफ़ नहीं करते. ज़रूरी नहीं की किसी का बुरा सिर्फ किसी कार्य के द्वारा ही किया जाए. किसी के प्रति ग़लत सोच को भी अपने मन से कोसों दूर रखना चाहिए. वह महिला जो गर्भवती है या फिर अपने मासिक में है, उन्हें कड़वे शब्द कहना या उन्हें दुःख पहुंचाना भगवान शिव की नज़रों में घोर अपराध है. किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचना या उस नीयत से झूठ बोलना ‘छल-कपट’ की श्रेणी में आता है. ऐसा करने से बचें. अगर आप किसी के मान-सम्मान या प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाते हैं तो भगवान शिव की दृष्टि में यह भी एक जघन्य अपराध है. किसी की बुराई को पीठ पीछे करने से बचें. धर्म में ...

What is Rest in Peace (‪R IP‬)

ये “रिप-रिप-रिप-रिप” क्या है?   आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIP लिखने का “फैशन” चल पड़ा है, ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के कारण हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ या तो पता ही नहीं हैं, अथवा विकृत हो चुकी हैं, RIP शब्द का अर्थ होता है “Rest in Peace” #शान्ति से आराम करो# यह शब्द उनके लिए उपयोग किया जाता है जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो, क्योंकि ईसाई अथवा मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार जब कभी “जजमेंट डे” अथवा “क़यामत का दिन” आएगा, उस दिन कब्र में पड़े ये सभी मुर्दे पुनर्जीवित हो जाएँगे… अतः उनके लिए कहा गया है, कि उस क़यामत के दिन के इंतज़ार में “शान्ति से आराम करो” ! लेकिन हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है, हिन्दू शरीर को जला दिया जाता है, अतः उसके “Rest in Peace” का सवाल ही नहीं उठता ! हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य की मृत्यु होते ही आत्मा निकलकर किसी दूसरे नए जीव  काया शरीर नवजात में प्रवेश कर जाती है , उस आत्मा को अगली यात्रा हेतु गति प्रदान करने के लिए ही श्राद्धकर्म की परंपरा...

गाय माता की रक्षा एवं सेवा से प्रापत होने वाला पुण्य

Image
1– जिस भूमि पर गाय को रविवार के दिनस्नान कराया जाता है,वहां लक्ष्मी का वासहोता है तथा लक्ष्मी स्थिर रहतीहै,वहां के निवासी स्वस्थ एवं चैन से रहते है. 2 – जिस घर में गौमूत्र का यदा-कदा छिडकाव किया जाता हो,वह घरलक्ष्मी से युक्त होता है. 3– घर के किसी भी भाग में हमेशा गोबरलेपन करने से लक्ष्मी उस घर में सततबनी रहती है. 4– गाय को स्नान कराने वाले को कोटि-कोटि पुण्य प्राप्त होता है... 5. आजकल लोग गौ माता को कुछभी बचाकुचा खाना देते हैं.... यादरहे कि आपके घर के सामने गौ माताजो भी खाती है वो आपकेपूर्वजो को मिलता है. 6 गाय के दुध में स्वर्ण तत्व पाये जातेहै .यह तत्व माँ के दुध के अतिरिक्त दुनियाँ मेंकिसी भी पदार्थ में नही है। 7 गाय के गोबर से प्रतिवर्ष 4500 लीटर बायोगैस मिल,सकता है।. 8 गाय,द्वारा छोड़ी गयी श्वास से सभी अदृश्य एवं हानिकारक,बैक्टेरिया मर जाते है| ये अंदर ऑक्सीजन लेती है लेकिन बाहर (co2 +o2) छोडती है जिसमें o2 की प्रमाण ज्यादा है 9 गाय के सिंग चंद्रमा से आने वाली ऊर्जा को अवशोषित कर शरीर को देते है| प्रतिदिन गाय के सिंग पर हाथ फेरने से गुस्सा नहीं आता है।

मरणासन्न से पहले रावण ने लक्ष्मण को बताई थी ये 3 बातें

Image
 जिस समय रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस समय श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए। रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मणजी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है। 1- पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैं श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई। 2- दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया | मैंने जिन्हें साध...

रावण जैसी ‘अहंकारी संतान’ मिलती है

Image
हिन्दू पौराणिक इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया भर में लंकापति रावण से बड़ा शिव भक्त नहीं हुआ, जिसकी कठोर तपस्या ने शिवजी को भी उसे वरदान देने के लिए विवश कर दिया था। महापंडित रावण का जन्म दरअसल इसका रहस्य रावण के जन्म से ही जुड़ा है। रावण, एक ऋषि पिता और असुर माता की संतान था। उनके पिता प्रख्यात ऋषि विश्रवा थे लेकिन माता एक असुर थी, जिनका नाम कैकेसी था। असुर रावण एक ऋषि की संतान होने के बावजूद रावण ने असुर के रूप में क्यों जन्म लिया? क्यों उसका किसी साधारण मनुष्य के रूप में नहीं बल्कि दैत्य के रूप में जन्म हुआ? पौराणिक कथा एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण का असुर रूप में जन्म लेना उसकी माता की भूल थी। यदि कैकेसी ने वह भूल ना की होती तो आज रावण को दुनिया दैत्य रावण के नाम से ना जानती। ऋषि विश्रवा संयोग से प्रकाण्ड ऋषि विश्रवा का विवाह एक असुर कन्या कैकेसी से हो गया। विवाह पश्चात एक शाम ऋषि पूजा-पाठ में व्यस्त थे। वे तन-मन से अपनी पूजा में लीन थे कि तभी कैकेसी ने उनसे संसर्ग की इच्छा प्रकट की। कैकेसी का हठ ऋषि ने इनकार करते हुए कहा कि वो उन्हें पूजा जैसे पवित्र कार्य को करने ...

श्री गणेश जी का एकाग्रचित होकर करें जाप इस स्त्रोत ......

Image
गणपति को सभी देवी-देवताअों में सर्वप्रथम पूजा जाता है। हर शुभ कार्य करने से पूर्व श्री गणेश जी की पूजा का विधान है। श्रीगणेश जी की आराधना से बड़े से बड़े कष्ट मिट जाते हैं। वहीं गणेश स्त्रोत एक ऐसा मंत्र हैं जिसके जाप मात्र से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं अौर व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। सुबह शीघ्र उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत होकर श्रीगणेश की पूजा करें। उसके बाद एकाग्रचित होकर श्रीगणेश का ध्यान करते हुए गणपति स्त्रोत का 7 या 11 बार जाप करें। इस स्त्रोत के जाप से व्यक्ति की सभी परेशानियों का नाश हो जाएगा। इसके साथ ही दुर्भाग्य का नाश हो सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को सुख-समृद्धि व यश भी मिलता है। गणपति स्रोत सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम्। गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ॥1॥ गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं रीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम्। सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥2॥ शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं प्रकाम...