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Showing posts from August, 2017

गाय माता की रक्षा एवं सेवा से प्रापत होने वाला पुण्य

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1– जिस भूमि पर गाय को रविवार के दिनस्नान कराया जाता है,वहां लक्ष्मी का वासहोता है तथा लक्ष्मी स्थिर रहतीहै,वहां के निवासी स्वस्थ एवं चैन से रहते है. 2 – जिस घर में गौमूत्र का यदा-कदा छिडकाव किया जाता हो,वह घरलक्ष्मी से युक्त होता है. 3– घर के किसी भी भाग में हमेशा गोबरलेपन करने से लक्ष्मी उस घर में सततबनी रहती है. 4– गाय को स्नान कराने वाले को कोटि-कोटि पुण्य प्राप्त होता है... 5. आजकल लोग गौ माता को कुछभी बचाकुचा खाना देते हैं.... यादरहे कि आपके घर के सामने गौ माताजो भी खाती है वो आपकेपूर्वजो को मिलता है. 6 गाय के दुध में स्वर्ण तत्व पाये जातेहै .यह तत्व माँ के दुध के अतिरिक्त दुनियाँ मेंकिसी भी पदार्थ में नही है। 7 गाय के गोबर से प्रतिवर्ष 4500 लीटर बायोगैस मिल,सकता है।. 8 गाय,द्वारा छोड़ी गयी श्वास से सभी अदृश्य एवं हानिकारक,बैक्टेरिया मर जाते है| ये अंदर ऑक्सीजन लेती है लेकिन बाहर (co2 +o2) छोडती है जिसमें o2 की प्रमाण ज्यादा है 9 गाय के सिंग चंद्रमा से आने वाली ऊर्जा को अवशोषित कर शरीर को देते है| प्रतिदिन गाय के सिंग पर हाथ फेरने से गुस्सा नहीं आता है।

मरणासन्न से पहले रावण ने लक्ष्मण को बताई थी ये 3 बातें

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 जिस समय रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस समय श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए। रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मणजी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है। 1- पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैं श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई। 2- दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया | मैंने जिन्हें साध...

रावण जैसी ‘अहंकारी संतान’ मिलती है

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हिन्दू पौराणिक इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया भर में लंकापति रावण से बड़ा शिव भक्त नहीं हुआ, जिसकी कठोर तपस्या ने शिवजी को भी उसे वरदान देने के लिए विवश कर दिया था। महापंडित रावण का जन्म दरअसल इसका रहस्य रावण के जन्म से ही जुड़ा है। रावण, एक ऋषि पिता और असुर माता की संतान था। उनके पिता प्रख्यात ऋषि विश्रवा थे लेकिन माता एक असुर थी, जिनका नाम कैकेसी था। असुर रावण एक ऋषि की संतान होने के बावजूद रावण ने असुर के रूप में क्यों जन्म लिया? क्यों उसका किसी साधारण मनुष्य के रूप में नहीं बल्कि दैत्य के रूप में जन्म हुआ? पौराणिक कथा एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण का असुर रूप में जन्म लेना उसकी माता की भूल थी। यदि कैकेसी ने वह भूल ना की होती तो आज रावण को दुनिया दैत्य रावण के नाम से ना जानती। ऋषि विश्रवा संयोग से प्रकाण्ड ऋषि विश्रवा का विवाह एक असुर कन्या कैकेसी से हो गया। विवाह पश्चात एक शाम ऋषि पूजा-पाठ में व्यस्त थे। वे तन-मन से अपनी पूजा में लीन थे कि तभी कैकेसी ने उनसे संसर्ग की इच्छा प्रकट की। कैकेसी का हठ ऋषि ने इनकार करते हुए कहा कि वो उन्हें पूजा जैसे पवित्र कार्य को करने ...

श्री गणेश जी का एकाग्रचित होकर करें जाप इस स्त्रोत ......

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गणपति को सभी देवी-देवताअों में सर्वप्रथम पूजा जाता है। हर शुभ कार्य करने से पूर्व श्री गणेश जी की पूजा का विधान है। श्रीगणेश जी की आराधना से बड़े से बड़े कष्ट मिट जाते हैं। वहीं गणेश स्त्रोत एक ऐसा मंत्र हैं जिसके जाप मात्र से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं अौर व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। सुबह शीघ्र उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत होकर श्रीगणेश की पूजा करें। उसके बाद एकाग्रचित होकर श्रीगणेश का ध्यान करते हुए गणपति स्त्रोत का 7 या 11 बार जाप करें। इस स्त्रोत के जाप से व्यक्ति की सभी परेशानियों का नाश हो जाएगा। इसके साथ ही दुर्भाग्य का नाश हो सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को सुख-समृद्धि व यश भी मिलता है। गणपति स्रोत सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम्। गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ॥1॥ गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं रीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम्। सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥2॥ शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं प्रकाम...

सूर्य नारायण धाम

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वेदत्रयी स्वरूपा संसार की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय के कारण विवस्वान की आकाशीय पूजा का हिन्दुओं में अनादिकाल से प्रचलन रहा है। हिन्दूमत के अनुसार ज्योतिपुंज, ऊर्जादायक, जगत के एकमात्र नेत्र, अग्नि के समान निर्मल, स्वर्ण कांतियुक्त सूर्य देव की प्रात:कालीन बेला में दैनिक पूजा से जीवन के समस्त रत्न अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं। भारत के सूर्य नारायण की मंदिरों में देवरूप में पूजा करने की परिपाटी भी पुरातन है। देवाधिदेव सूर्यदेव की पूजा देश के भिन्न-भिन्न मंदिरों में असीम श्रद्धा एवं विश्वास के साथ की जाती है। देश में सूर्य भगवान के भव्य मंदिरों में कोणार्क उड़ीसा का मंदिर अग्रगण्य है। इसके पश्चात हिमाचल के सूर्य नारायण मंदिर नीरथ का नाम आता है। नीरथ एक पौराणिक ग्राम है। लोक धारणा है कि यह गांव भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की शौर्य स्मृतियों से जुड़ा है। नीरथ ग्राम के नामकरण का आधार भी परशुराम का अटूट पराक्रम बताया जाता है। लोकश्रुति है कि तत्कालीन परिस्थितियों में नीरथ पर दैत्य का एकछत्र साम्राज्य था। दैत्य के भय से गांव आबाद नहीं हो पा रहा था। दैत्य की भयंकर गर्जना से सारा वात...

माँ लक्ष्मी

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                                    शुक्रवार  माँ लक्ष्मी का दिन  माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करना बड़ा ही आसान है आज  यह चमत्कारी उपाय करें आज शाम के समय माँ लक्ष्मी के मंदिर जाकर अपनी आयु के बराबर साबुत पान मीठे चढ़ाएं अब "रक्तचन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम् | मया दत्तं महालक्ष्मि चन्दनं प्रतिगृह्यताम् ||  ॐ महालक्ष्म्यै नमः रक्तचन्दनं समर्पयामि" इस धनपति मंत्र के १०८ जाप करें  घर आने के बाद माँ लक्ष्मी को प्रणाम करें और गृह लक्ष्मी को धन दें बरकत अवश्य होगी

ऩारायण कृपा......

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एक नगर में एक सेठ व सेठानी रहते थे और सेठानी रोज विष्णु भगवान की पूजा करती थी. सेठ को उसका पूजा करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. इसी वजह से एक दिन सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया. घर से निकलने पर वह जंगल की ओर गई तो देखा चार आदमी मिट्टी खोदने का काम कर रहे थे. उसने कहा कि मुझे नौकरी पर रख लो. उन्होंने उसे रख लिया लेकिन मिट्टी खोदने से सेठानी के हाथों में छाले पड़ गए और उसके बाल भी उड़ गए. वह आदमी कहते हैं कि बहन लगता है तुम किसी अच्छे घर की महिला हो, तुम्हें काम करने की आदत नहीं है. तुम ये काम रहने दो और हमारे घर का काम कर दिया करो वह चारों आदमी उसे अपने साथ घर ले गए और वह चार मुट्ठी अनाज लाते और सभी बाँटकर खा लेते. एक दिन सेठानी ने कहा कि कल से आठ मुठ्ठी अनाज लाना. अगले दिन वह आठ मुठ्ठी अनाज लाए और सेठानी पड़ोसन से आग माँग लाई. उसने भोजन बनाया, विष्णु भगवान को भोग लगाया फिर सभी को खाने को दिया. सारे भाई बोले कि बहन आज तो भोजन बहुत स्वादिष्ट बना है. सेठानी ने कहा कि भगवान का जूठा है तो स्वाद तो होगा ही. सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा और आस-पड़ोस के सारे लोग कहने लगे क...

फूलों से घर एवं वातावरण को प्रदूषण से कैसे बचाएं ?

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1. Anthurium andraeanum (राजहंस लिली) राजहंस लिली हवा में नमी और वाष्प को बनाए रखती है. यह Xylene और Toluene जैसी हानिकारक गैसों को अवशोषित कर उन्हें हानि रहित पदार्थ में बदल देती है. 2. Gerbera jamesonii यह उजले फूलों वाला पौधा हवा में मौजूद विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद करता है. इसे अच्छी तरह से गर्म एरिया में रखना होता है. 3. Scindapsus (’Golden Lotos’) गोल्डेन लोटस छाया में बढ़ने वाले सभी पौधों में से बेस्ट पौधा है. यह आपके घर की हवा को साफ रखने के लिए उत्तम है. लेकिन एक बात याद रहे कि ये एक तरह से जहरीला पौधा भी होता है. इसलिए इसे बच्चों और जानवरों से दूर रखना चाहिए. 4. Aglaonema इस चीनी सदाबहार पौधे को बड़े होने के लिए ज़्यादा प्रकाश की ज़रूरत नहीं होती. लेकिन इसे प्रचुर मात्रा में नमी युक्त हवा की ज़रूरत होती है. यह साबित हो गया है कि ये पौधा हवा से बेंजीन जैसे पदार्थों को फिल्टर कर हवा को शुद्ध बनाता है. 5. Chlorophytum ( ’spider plant’) यह पौधा घर के अंदर उपयोग के लिए काफी अच्छा है. इसका कारण सिर्फ़ सुंदर दिखना नहीं है, बल्कि अध्ययन से प्रमाणित ह...

आखिर क्यों माता पार्वती ने दिया शिव, विष्णु, नारद, कार्तिकेय और रावण को श्राप:

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एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ द्युत (जुआ) खेलने की अभिलाषा प्रकट की। खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए। हारने के बाद भोलेनाथ अपनी लीला को रचते हुए पत्तो के वस्त्र पहनकर गंगा के तट पर चले गए। कार्तिकेय जी को जब सारी बात पता चली, तो वह माता पार्वती से समस्त वस्तुएँ वापस लेने आए। इस बार खेल में पार्वती जी हार गईं तथा कार्तिकेय शंकर जी का सारा सामान लेकर वापस चले गए। अब इधर पार्वती भी चिंतित हो गईं कि सारा सामान भी गया तथा पति भी दूर हो गए। पार्वती जी ने अपनी व्यथा अपने प्रिय पुत्र गणेश को बताई तो मातृ भक्त गणोश जी स्वयं खेल खेलने शंकर भगवान के पास पहुंचे। गणेश जी जीत गए तथा लौटकर अपनी जीत का समाचार माता को सुनाया। इस पर पार्वती बोलीं कि उन्हें अपने पिता को साथ लेकर आना चाहिए था। गणेश जी फिर भोलेनाथ की खोज करने निकल पड़े। भोलेनाथ से उनकी भेंट हरिद्वार में हुई। उस समय भोले नाथ भगवान विष्णु व कार्तिकेय के साथ भ्रमण कर रहे थे। पार्वती से नाराज भोलेनाथ ने लौटने से मना कर दिया। भोलेनाथ के भक्त रावण ने गणेश जी के वाहन मूषक को बिल्ली का रूप धारण करके डरा दिया। मूषक गणेश जी ...

शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार

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शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इन अवतारों के बारे में जानते हैं। धर्म ग्रंथों  के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए थे। 1- वीरभद्र अवतार (Virbhadra Aavtar) : - भगवान शिव का यह अवतार तब हुआ था, जब दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग किया था। जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए। शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया। 2- पिप्पलाद अवतार (Piplad Aavtar) :- मानव जीवन में भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार का बड़ा महत्व है। शनि पीड़ा का निवारण पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सका। कथा है कि पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिय...

"हम सब निर्णय करें" गौमाता के जीवन के लिए

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1 सभी संत पुजारी बाबा एवं आश्रम मंदिर में गौमाता अवश्य रखें ! 2 बिना गौमाता के घी गौहर एवं गौमूत्र गौदुगध के बिना कोई भी पूजा पाठ हवन नही करवाएंगे ! 3 भगवान को भोग गौमाता के दूध में बनी मिठाई का ही लगाएंगे 4 दीपक सिर्फ गौ माता के घी का ही जलाएंगे 5 हमारे घरों मे पूर्व काल की तरह मेहमानवाजी पर दूध घी छाछ का ही उपयोग करें एवं घर आए लोगों को भी प्रेरित कर दे 6 बीमारियों एवं मोटापे से बचाव के लिए कोलड ड्रिंक के स्थान पर दूध छाछ का उपयोग करें 7 चाय काफी बोरनविटा के स्थान पर छाछ दूध को ही उपयोग करें 8 हरेक परिवार नियम से हर मांह कुछ दलिया दलहन एवं हरे चारे का भेंट गौशाल यां गौवास में देकर आंए पर जहां दूध बेचने वाले धंधा करते हों वहां दान न करें ये आपके लिए अहितकर होगा 9 घर पर दुकान पर दान पेटी में कुछ न कुछ डालते रहना एवं वह गौ सेवा संस्थान के लिए देना आपके जीवन की कठिनाइयों को दूर करता रहेगा 10 पलासटिक के लिफाफों का उपयोग नहीं करेंगे अगर प्रयोग करें तो उनको संभाल कर रिसाईकल करने के लिए तैयार रखे 11 अपना एवं अपने पारिवारिक सदस्यों का जन्मदिन गौवास एवं गौशाला...

न्याय अधिकारी

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बात उस समय की है जब भगवान विष्णु, शंकर और ब्रह्मा के बीच एक संवाद शुरू हुआ। यह संवाद था संसार में एक न्याय अधिकारी को जन्म देने का। यह संवाद तब शुरू हुआ जब देवो और असुरों के बीच लगातार युद्ध हो रहा था। वरन असुरो को लगता था कि बाद जब न्याय की बात आती है तो फैसला देवों के हक में सुनाया जाता है। परंतु असुरों के गुरु शुक्राचार्य को भगवान शंकर पर पूर्ण विश्वास था कि वह देवों के साथ असुरों के हितों की भी रक्षा करेंगे। मसलन सच तो यही है कि भगवान शंकर ने अपने परम भक्त शुक्राचार्य को निराश नहीं किया। भगवान् शंकर ही थे जिन्होंने शनिदेव के जन्म की पटकथा लिखी। शनिदेव का जन्म सूर्य पुत्र के रूप में हुआ जिनकी मां का नाम छाया था। एक पौराणिक कथा के अनुसार छाया ने शनि को एक जंगल में छुपा के रख उनका वही पालन-पोषण किया। यम के अलावा शनि भी एक पुत्र है। शनि देव को भी नहीं मालूम था उनके पिता स्वयं सूर्य देव है। लेकिन यह राज बहुत दिनों तक छुप ना सका। क्योंकि संसार को उसका न्याय अधिकारी मिलना था जो कर्मों के आधार पर लोगों को न्याय और दंड देगा। इधर देवाधिपति इंद्र देव और शुक्राचार्य जो असुरो के गुरु थे उ...